माँ की सीख: (Short Motivational Hindi Story)

माँ की सीख: हारिये न हिम्मत

    सूरज अपनी कालेज की पढाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा था. अपने खर्चों के लिए उसने एक प्राइवेट हिंदी माध्यम स्कूल में अध्यापन करना चालू कर दिया. लेकिन ये तो महज एक अपने आप को व्यस्त रखने का माध्यम था. हर परीक्षा में फर्स्ट क्लास आने वाले सूरज का जब जिंदगी की हकीकत से सामना हुआ तो उसने अपने आप को बहुत ही परेशान और कमजोर पाया क्योंकि जो बातें उसने किताबों में सीखी थीं वास्तविक जिंदगी उससे बहुत अलग थी. नौकरी की जद्दोजहद और रुपये पैसों की तंगी हर जगह सूरज परेशान था. संघर्ष करते करते उसे काफी समय हो गया; परन्तु सफलता और कामयाबी उससे अभी बहुत दूर थीं या यूँ कहें कि सफलता उसे दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रहीं थीं.

ऐसे हालातों में सूरज के साथ भी वही हुआ जो अकसर बेरोजगार युवाओं के साथ होता है. सूरज अपनी जिंदगी से निराश हो गया था और उसे चारों तरफ निराशा और नाउम्मीदी ही नज़र आती थी.

कई दिनों की ऐसी मानसिक स्थिति के कारण सूरज के मन में अब बुरे बुरे ख्यालात आने लगे थे. कभी कभी उसे लगता कि अब ये जिंदगी किसी काम की नहीं है. एक दिन उसने अपनी माँ से कहा कि उसके मन में आत्महत्या करने के विचार आते हैं.

सूरज की माँ बहुत ही समझदार थीं. उन्होंने सूरज को रोकने या समझाने के बजाए सिर्फ एक बात कही.

 "सूरज अभी तो जिंदगी का शो शुरू भी नहीं हुआ और तुम "दि एंड" की सोचने लगे!"

"अभी तो जिंदगी की कितनी उलझनें, परेशानियाँ और कितनी ही जिम्मेदारियां आने वाली हैं, अभी तो तुमने कुछ भी नहीं देखा और अभी से ही 'दि एंड'...!"

"सूरज, तुमने अपनी जिंदगी में सरल रास्ता चुनना चाहते हो."

"सूरज तुमने कठिन रास्ते के बजाए सरल रास्ता इसलिए चुना क्योंकि तुम कठिनाइयों से बचना चाहते हो, जबकि जिन्दगी की कठिनाइयों से पलायन हमारे विकास को रोकता है."

"कठिन रास्ते, मुश्किल मंजिलें हमें ज्यादा समझदार और ज्यादा जिम्मेदार बना देते हैं. कठिन रास्तों से हम ज्यादा सजग और ज्यादा जागरूक हो जाते हैं."

माँ ने सूरज को न तो सांत्वना दी और ना ही किसी प्रकार का दिलासा दिया, लेकिन माँ की बातों ने सूरज के मन को झकझोर दिया और उसे अपने अन्दर की शक्तियों का अहसास कराया. उसे महसूस हुआ कि उसका हमेशा एक तरफ़ा सोचना गलत था. परेशानियाँ और मुश्किलें हर किसी के सामने आती हैं और इंसान को हर हाल में उनसे जूझना है.

उम्मीदियाँ और नाउम्मीदियाँ हर किसी के सामने आती हैं. मुश्किलें सबके सामने आती है मगर हौंसले बनाये रखने पड़ते है.

खुद को मिटाने की सोचना बड़ा सरल है मगर खुद को हर हाल में मजबूत बनाये रखना ही सच्चा पुरुषार्थ है.
सूरज की तरह हमारे देश में कितने ही दूसरे सूरज होंगे जिनकी रोशनी को उनके परिवार और समाज को जरुरत है. बेरोजगारी, निराशा और हताशा इनके जीवन की नियति नहीं है. एक सच्ची सलाह इनके जीवन को आलोकित कर सकती है. कठिन परिस्थितियां हमें मजबूत बनाने कि लिए आती हैं और उन्हें हंसते-हंसते पार कर जाना ही जिंदगी है.
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अनिल साहू   www.anilsahu.blogspot.com
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