दो दोस्तों की कहानी

दो दोस्तों की कहानी, फ्रेंडशिप स्टोरी हिंदी में       जब सुमित से उसकी दोस्ती हुई तब आकाश उन दिनों कालेज में पढता था. आकाश ग्रामीण परिवेश से आया था. शहर का माहौल उसके लिए नया था. सुमित उसकी क्लास में सबसे ज्यादा मिलनसार और हंसमुख लड़का था, यही वजह थी कि आकाश की उससे दोस्ती बड़ी जल्दी हो गई.

      आकाश सबसे कम बात करने वाला लड़का था और सुमित सबसे बड़ी जल्दी दोस्ती कर लेता था. यही कारण था कि उसके कालेज में सबसे अधिक दोस्त थे. कहते हैं कि सबसे ज्यादा जलन अपने वाले से होती है. आकाश को भी सुमित से जलन होने लगी. सुमित की खुशहाल जिंदगी और उसके चेहरे पर हमेशा प्रसन्नता और जीत के भाव देखकर आकाश के मन को जलन होती. आकाश उससे ईर्ष्या करने लगा.


आकाश को कई बार लगता कि सुमित उससे जलता है. उसे लगता कि सुमित घर-परिवार से संपन्न और खुशहाल है, इसलिए वो उसके सामने अपना रुतबा और बड़प्पन दिखाता रहता है. वह उससे हमेशा ईर्ष्या करता. सुमित के प्रति उसकी भावनाएं उसे अन्दर ही अन्दर जलाने लगीं.

एक दिन किसी काम से आकाश का सुमित के घर जाना हुआ. जब वो सुमित के घर पहुंचा तो घर पहुंचकर वहां के हालात उसे अपनी कल्पनाओं से बिलकुल विपरीत मिले. आकाश का घर बहुत ही छोटा और मामूली था. आर्थिक स्थिति भी उसकी ठीक नहीं थी. उसके घर में एक बीमार पिता, दो छोटी बहनें जिनकी शादी की जिम्मेदारी भी आकाश की थी. सुमित के माता पिता ने आकाश को उसका दोस्त समझकर उसके संघर्ष की पूरी कहानी बताई कि किस तरह सुमित सुबह-शाम पार्ट टाइम जॉब करके घर का खर्च चला रहा है और अपनी पढाई कर रहा है. सुमित की मेहनत और संघर्ष की कहानी सुनकर आकाश कि आँखों में आंसू भर आये और सुमित का कद उसकी नज़रों में कई गुना बढ़ गया.

सुमित के पिताजी ने  बताया कि सुमित हमेशा उसकी तारीफ करता है. हमेशा सोचता है कि आकाश की मदद करता रहे, वह इस शहर में नया-नया जो है.

सुमित जब वहाँ से घर वापिस आया तो उसे अपनी भावनाओं से बहुत ग्लानि महसूस हई. उसे बहुत पश्चाताप हुआ कि सुमित ने हमेशा उसकी सहायता की उसने हमेशा सुमित से ईर्ष्या की, जब कि सुमित धन दौलत के मामले में उससे बहुत ही कमजोर है.

आज सुमित गरीब होकर भी अमीर है और वो अमीर होकर भी गरीब है.

गलत सुमित नहीं वो खुद है जब कि सुमित उससे हर तरह महान है. और उसने उसी दिन से अपने आपको बदलने का निश्चय कर लिया.

दोस्तों इस छोटी सी कहानी से यह बात सीखने को मिलती है कि जो व्यक्ति अपने दोस्तों या रिश्तेदारों से ईर्ष्या करता है वो अपने ही बनाये दुर्भावनाओं के चक्र में उलझा रहता है. जरुरी नहीं कि जो व्यक्ति हमेशा प्रसन्न और खुशहाल दिखता है वो वाकई में उतना खुशहाल हो. कई लोग ऐसे होते हैं जो अपने दर्द को छुपाकर हमेशा मुस्कुराते रहते हैं. कई व्यक्ति  दूसरों को अपनी कमियां और मजबूरियां नहीं बताते और हमेशा प्रसन्न रहते हैं. जो व्यक्ति अपने दुःख को छुपा कर हमेशा दूसरों के सामने खुश रहता है उसके व्यक्तित्व की गरिमा कुछ और ही रहती है.

किसी ने क्या खूब कहा था- "मुश्किलों के सामने कभी हार मत मानो. कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो, हर हाल में मुस्कुराते रहो और अपने मन की शांति को कभी नष्ट मत होने दो. तुम अगर हमेशा मुस्कुराते रहोगे तो एक दिन मुश्किलें भी हार मान कर हार जाएँगी."

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अनिल साहू
www.anilsahu.blogspot.in

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