गलत कमाई का पैसा और उसका फल

जिंदगी कभी-कभी बड़े कठिन इम्तेहान लेती है. इसे ईश्वर की ही माया कहें या अपने कर्मों का फल. गलत इंसान को भी जब कभी भगवान ऐसे दोराहे पर खड़ा कर देता है कि उसकी मति और सारी हेकड़ी चली जाती है. उस दिन रामशरण के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. रामशरण अपनी छोटी सी दुकान में नशीली वस्तुओं का व्यापार करता था. रामशरण को अपने धंदे पर बहुत नाज था. अच्छी-खासी कमाई हो जाती थी. अपनी दाल रोटी की गुजर बसर के साथ-साथ अपने गलत शौकों को पूरे करने के लिए पैसों की व्यवस्था हो जाती थी. गलत करम की कमाई करने पर भी वह खुश था क्योंकि उसकी रोजी-रोटी का कोई दूसरा जरिया भी तो नहीं था उसके पास. बस एक ये धंदा आराम का था. इज्ज़त खराब होती थी कोई गम नहीं.

रामशरण को उसके मित्र रामलाल ने कई बार समझाया कि भाई ये काम ठीक नहीं है. तुम जो नशे का काम कर रहे हो इससे कितनों के बच्चे, कितनों के पति और कितनों के भाई बर्बाद हो रहे हैं. तुम जो धंदा कर रहे हो इससे तुम दूसरे लोगों को भ्रष्ट करने का पाप कर रहे हो. किसी दिन तुम पछिताओगे. मगर रामशरण की समझ में ये बात नहीं आती थी. उसे तो बस कमाई और फायदा नजर आता था........

(कहानी का शेष भाग जल्दी ही publish किया जायेगा.)

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